69 thousand Assistant Teacher Recruitment 2025: लखनऊ की ठंडी हवा में आज हज़ारों युवाओं की धड़कनें एक ही सवाल से बंधी हुई हैं – क्या उन्हें इंसाफ मिलेगा? परिषदीय विद्यालयों की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का सपना लिए घूम रहे अभ्यर्थी पिछले कई महीनों से बस तारीख़ों का इंतज़ार कर रहे हैं। अब आखिरकार, आज सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होने जा रही है।
अभ्यर्थियों का टूटा सब्र, फिर भी उम्मीद ज़िंदा
हर सुबह जब ये अभ्यर्थी उठते हैं तो मन में यही ख्याल आता है कि शायद आज कुछ नया होगा, लेकिन पिछले 12 महीनों से सिर्फ़ तारीख़ें बदल रही हैं और फैसले टलते जा रहे हैं। कई उम्मीदवार तो नौकरी की उम्मीद छोड़ चुके हैं, लेकिन फिर भी दिल के किसी कोने में एक आस बाकी है। उनका कहना है—
“हम पढ़े-लिखे हैं, मेहनत की है, बस चाहते हैं कि सरकार और कोर्ट हमें वो हक़ दें जिसके हम हक़दार हैं।”
संघर्ष की आवाज़ सड़कों पर भी
पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा की महिला सभा की प्रदेश प्रवक्ता पूनम यादव और प्रदेश प्रवक्ता शिव शंकर ने सरकार से साफ कहा है कि अब चुप्पी तोड़नी होगी। सरकार को सुप्रीम कोर्ट में जाकर अभ्यर्थियों के पक्ष में खड़ा होना चाहिए।
रविवार की सुबह आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थी भारी संख्या में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के घर के बाहर जमा हुए। वे मुख्यमंत्री आवास तक जाना चाहते थे, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने उन्हें रोक लिया और बसों में बैठाकर इको गार्डन भेज दिया। यह नज़ारा उस बेचैनी को दिखाता है जो इन युवाओं के भीतर पिछले सालों से पल रही है।
सरकार से उम्मीद, कोर्ट से इंसाफ
अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री को व्हाट्सएप पर संदेश भेजकर अपनी तकलीफ़ बताई थी। जवाब में उपमुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा विभाग को चिट्ठी लिखकर कहा कि इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान दिया जाए और अभ्यर्थियों को न्याय दिलाया जाए।
आज कोर्ट में होने वाली सुनवाई सिर्फ़ एक केस नहीं है, बल्कि यह उन हज़ारों घरों की उम्मीद है, जहाँ बच्चे अपने माता-पिता से रोज़ यही पूछते हैं— “पापा, आपकी नौकरी कब लगेगी?”
Disclaimer: यह लेख अभ्यर्थियों और मीडिया में आई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने वाले दिनों में तस्वीर साफ़ करेगा।









