69000 शिक्षक भर्ती 2025: आरक्षित वर्ग अभ्यर्थियों का आक्रोश, सरकार पर बेरुखी के आरोप

Published On: August 19, 2025
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69000 शिक्षक भर्ती 2025
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69000 शिक्षक भर्ती 2025: लखनऊ की सड़कों पर सोमवार का दिन आरक्षित वर्ग के हजारों अभ्यर्थियों के आक्रोश से गूंज उठा। 69000 शिक्षक भर्ती में न्याय की उम्मीद लेकर संघर्ष कर रहे इन युवाओं ने बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के आवास का घेराव किया। लेकिन उनकी आवाज़ मंत्री तक न पहुँच सकी और पुलिस ने बलपूर्वक अभ्यर्थियों को ईको गार्डेन ले जाकर धरना स्थल पर बैठा दिया।

लंबी लड़ाई, लेकिन हल नहीं निकला

अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिसके चलते आरक्षित वर्ग के बहुत से अभ्यर्थी नौकरी से वंचित रह गए। हाईकोर्ट ने इनकी लड़ाई में फैसला उनके पक्ष में दिया, लेकिन सरकार की लापरवाही के कारण उसका पालन नहीं हुआ। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है, जहां 20 से अधिक बार तारीखें लग चुकी हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो पाई।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में उनका पक्ष मजबूती से रखने से पीछे हट रही है। इसी कारण उन्हें न्याय मिलने में देरी हो रही है।

सरकार पर बेरुखी का आरोप

धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल और धनंजय गुप्ता ने बताया कि उनकी मंत्री से मुलाकात तक नहीं हो पाई। पुलिस ने उन्हें जबर्दस्ती उठाकर ईको गार्डेन पहुंचा दिया। वहीं, अभ्यर्थियों की अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार से बातचीत हुई, लेकिन वहां भी कोई समाधान नहीं निकल सका। उन्होंने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं सुनी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।

सुनवाई अनिश्चित, अभ्यर्थी चिंतित

पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कश्यप और प्रदेश संरक्षक भास्कर सिंह ने बताया कि 19 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन यह केस अनलिस्टेड हो गया। अब किसी को नहीं पता कि अगली सुनवाई कब होगी। इससे अभ्यर्थियों की बेचैनी और बढ़ गई है।

उनका कहना है कि सरकार चाहे तो सुप्रीम कोर्ट में याचियों को तुरंत लाभ देकर इस मामले का निस्तारण करा सकती है, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण अभ्यर्थी लगातार न्याय से वंचित हो रहे हैं।

अभ्यर्थियों की पीड़ा बनी सवाल

आज भी हजारों युवा अभ्यर्थी नौकरी की आस में दिन-रात न्याय का इंतज़ार कर रहे हैं। यह सिर्फ नौकरी की बात नहीं है, बल्कि उनके भविष्य और परिवार की उम्मीदों का सवाल है। हर बार तारीख आगे बढ़ने और सुनवाई टलने से उनका भरोसा टूट रहा है। अभ्यर्थियों की यही मांग है कि सरकार इस मामले में संवेदनशीलता दिखाए और सुप्रीम कोर्ट में जल्द से जल्द मजबूत पैरवी कर उनके जीवन में उम्मीद की रोशनी लाए।

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Disclaimer: यह लेख विभिन्न समाचारों और अभ्यर्थियों द्वारा साझा की गई सूचनाओं पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित अभ्यर्थियों और संगठनों के हैं। लेखक/प्रकाशक का इससे सहमत होना आवश्यक नहीं है।

Vipin Kumar

My name is Vipin Kumar. I am from Akbarpur, Ambedkar Nagar, Uttar Pradesh. For almost two years, I have enjoyed writing articles on automobiles, technology, and vacancies. Email: vipinkumar41711@gmail.com

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