EPS-95 Pension 2025: बुज़ुर्गों के लिए नई सौगात, अब ₹7,500 मिलेगी हर महीने!

Published On: August 29, 2025
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EPS-95 Pension 2025: बुज़ुर्ग होना अपने आप में एक इम्तिहान है। शरीर ढल जाता है, ताक़त कम हो जाती है, और उम्मीद सिर्फ़ इस बात की रहती है कि बुढ़ापे में सम्मान और सुकून भरा जीवन मिले। लेकिन सोचिए, जिसने पूरी ज़िंदगी नौकरी की, दिन-रात मेहनत की, वही जब रिटायर होकर घर बैठे तो उसे हर महीने इतनी कम पेंशन मिले कि दवाइयों और रसोई का खर्च भी मुश्किल से निकल पाए… कितना दर्द होता होगा ना?

यही हकीकत रही है भारत के EPS-95 पेंशनर्स की। करीब 78 लाख पेंशनर्स ऐसे हैं, जिनकी न्यूनतम पेंशन सालों से सिर्फ़ ₹1,000 पर अटकी हुई थी। आज जब हर चीज़ महंगी हो गई है – दाल, आटा, सब्ज़ी, गैस सिलेंडर से लेकर अस्पताल का खर्चा तक – तो यह पेंशन बुज़ुर्गों के लिए मज़ाक जैसी बन गई थी। लेकिन अब 2025 उनके लिए नई उम्मीद लेकर आया है।

30 साल बाद पेंशन सुधार की गूंज

EPS-95 पेंशन योजना की शुरुआत 1995 में हुई थी। मक़सद था कि संगठित क्षेत्र के कर्मचारी रिटायर होने के बाद भी सम्मान के साथ जी सकें। लेकिन पेंशन की राशि सालों से वहीं की वहीं रही। अब पहली बार, सरकार और EPFO इस योजना की गंभीर समीक्षा कर रहे हैं। ट्रेड यूनियनों और EPS-95 राष्ट्रीय आंदोलन समिति (NAC) की लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार सरकार सुनती हुई दिख रही है।

₹7,500 पेंशन: अब बुढ़ापे में सुकून

नवीनतम चर्चाओं में यह तय हो रहा है कि पेंशन को बढ़ाकर सीधे ₹7,500 से ₹8,500 किया जाए। इसके साथ महंगाई भत्ता (DA) जोड़ने का भी प्रस्ताव है। यानी पेंशन अब महंगाई से जुड़ी रहेगी और जैसे-जैसे कीमतें बढ़ेंगी, वैसे-वैसे पेंशन भी बढ़ती जाएगी।

ज़रा सोचिए, जब किसी बुज़ुर्ग के हाथ में हर महीने ₹7,500 या उससे ज्यादा आएंगे, तो उसके चेहरे पर कितनी राहत और खुशी होगी। अब उन्हें बेटे-बेटियों के सामने हाथ फैलाने की ज़रूरत नहीं होगी। दवाई, किराया और खाने-पीने का खर्च कम से कम सम्मानजनक तरीके से निकल सकेगा।

सरकार और पेंशनर्स के बीच उम्मीद भरी बातचीत

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से जनवरी 2025 में हुई बैठकों और बीजेपी सांसद बसवराज बोम्मई के दबाव ने इस मामले को और तेज़ कर दिया है। मई 2025 तक इसे लागू करने की तैयारी बताई जा रही है।

यह पहली बार है कि EPS-95 पेंशन योजना पर इस स्तर की गंभीर बातचीत हो रही है। पेंशनर्स को लग रहा है कि अब उनकी आवाज़ सच में सुनी जा रही है।

चुनौतियाँ हैं, लेकिन समाधान भी

सच है, पेंशन बढ़ाने से सरकार के खजाने पर दबाव पड़ेगा। EPFO के फंड पर असर होगा। लेकिन सरकार आंशिक सब्सिडी मॉडल और योगदान दर में छोटे बदलाव करके इसे संभालने की योजना बना रही है। पेंशनर्स मानते हैं कि यह सिर्फ़ पैसों का मामला नहीं है, बल्कि सम्मान और सुरक्षा का भी सवाल है।

पेंशनर्स की सबसे बड़ी ख्वाहिश

EPS-95 राष्ट्रीय आंदोलन समिति की सबसे बड़ी मांग सिर्फ़ पेंशन बढ़ोतरी नहीं, बल्कि पेंशनर्स और उनकी पत्नियों के लिए मुफ्त इलाज की भी है। आखिर बुढ़ापे में सबसे बड़ी जरूरत दवाई और इलाज की ही होती है। अगर सरकार यह भी मान लेती है, तो सच में लाखों बुज़ुर्गों की ज़िंदगी बदल जाएगी।

आने वाले कल की उम्मीद

हर बजट से पहले पेंशनर्स की आंखों में एक ही सवाल होता है – “क्या इस बार हमें भी हमारी मेहनत का सही फल मिलेगा?” 2025 का बजट उनके लिए उम्मीदों से भरा है। अगर सबकुछ सही रहा तो यह बदलाव सिर्फ़ रकम का नहीं, बल्कि बुज़ुर्गों की ज़िंदगी में इज़्ज़त और सुकून लौटाने वाला होगा।

Disclaimer: यह लेख हालिया मीडिया रिपोर्ट्स और चर्चाओं पर आधारित है। अंतिम फैसला और लागू होने की तारीख सरकार की आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही तय होगी। पाठकों से आग्रह है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी ज़रूर लें।

Vipin Kumar

My name is Vipin Kumar. I am from Akbarpur, Ambedkar Nagar, Uttar Pradesh. For almost two years, I have enjoyed writing articles on automobiles, technology, and vacancies. Email: vipinkumar41711@gmail.com

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