Warning Lumpy Virus Outbreak : मवेशियों की जिंदगी पर संकट, पशुपालक परेशान
अंबेडकरनगर के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों मवेशियों पर लंपी वायरस का साया गहराता जा रहा है। जिन पशुओं को किसान परिवार के सदस्य की तरह पालते-पोसते हैं, वे ही अब इस खतरनाक बीमारी की चपेट में आकर पीड़ा झेल रहे हैं। खेत-खलिहानों से लेकर पशुशालाओं तक चिंता का माहौल है, क्योंकि दर्जनों मवेशियों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों अभी भी संक्रमण से जूझ रहे हैं।
बीमारी का असर न केवल पशुओं की सेहत पर दिख रहा है, बल्कि दूध उत्पादन पर भी गहरा असर पड़ा है। जिन परिवारों की आजीविका दूध पर टिकी है, उनके सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
Symptoms & Problems: बीमारी के लक्षण और पशुपालकों की परेशानी
लंपी वायरस से पीड़ित पशुओं के शरीर पर कठोर गांठें उभर आती हैं, खासकर चेहरे, गले और थनों पर। तेज बुखार, पैरों में सूजन, आंख और नाक से पानी बहना, घाव और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण आम हो गए हैं। कई पशु लंगड़ाकर चलने को मजबूर हैं। यह सब देखकर पशुपालकों के दिल दहले जा रहे हैं।
Cause of Infection: संक्रमण फैलने के मुख्य कारण
पशुपालन विभाग के अनुसार, लंपी वायरस मच्छर, मक्खी और जूं जैसे कीटों के जरिए तेजी से फैलता है। यही वजह है कि पशुशालाओं की साफ-सफाई और कीट नियंत्रण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारी लगातार गांव-गांव जाकर टीकाकरण अभियान चला रहे हैं ताकि संक्रमण को समय रहते रोका जा सके।
Vaccination Drive: प्रशासन और पशुपालन विभाग की कोशिशें
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग ने युद्धस्तर पर टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है। पशु चिकित्सक घर-घर जाकर प्रभावित मवेशियों की जांच कर रहे हैं और टीके लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने पशुपालकों से अपील की है कि किसी भी पशु में लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक को दिखाएं और बीमारी को छिपाने की गलती न करें।
Dairy Farmers Concern: पशुपालकों की चिंता और आर्थिक नुकसान
मवेशियों की बीमार हालत देखकर पशुपालकों की आंखों में चिंता साफ झलक रही है। दूध की कमी से आर्थिक बोझ बढ़ गया है और जानवरों की मौत ने भावनात्मक आघात भी दिया है। लोग दिन-रात अपने पशुओं की देखभाल कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही हालात सामान्य होंगे।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी पशु में लंपी वायरस या अन्य बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत योग्य पशु चिकित्सक से संपर्क करें।









