COEP: रोटेटिंग मशीनों के बारे में ज्ञान और उन्नत तकनीकों की समझ अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रही। हाल ही में, COEP (COEP टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी) के मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में आयोजित तीन दिवसीय रोटेटिंग मशीनरी बूटकैम्प ने इंजीनियरिंग छात्रों को एक अनोखा अवसर दिया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन समृद्धि स्किल्स पहल के तहत FSID द्वारा किया गया था, जिसे भारी उद्योग मंत्रालय का समर्थन प्राप्त था। इसका उद्देश्य छात्रों को रोटेटिंग मशीनों जैसे कि टर्बाइन्स, पंप्स, और कंप्रेसर्स के डिजाइन, संचालन और रखरखाव के बारे में गहरी जानकारी प्रदान करना था।
इस बूटकैम्प ने छात्रों को न केवल वास्तविकता में काम आने वाली तकनीकों से अवगत कराया, बल्कि उन्हें उभरती हुई तकनीकों का भी गहरा अनुभव कराया। छात्रों ने वाइब्रेशन विश्लेषण, डायनेमिक बैलेंसिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसे विषयों पर 3D विज़ुअलाइजेशन के माध्यम से प्रशिक्षण लिया। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि ये मशीनें उद्योगों में किस प्रकार कार्य करती हैं और उनके संचालन में कौन सी जटिलताएँ होती हैं।
COEP उभरती हुई तकनीकों के साथ बदलाव की दिशा में कदम
बूटकैम्प में शामिल छात्रों को इंडस्ट्रियल इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IIoT) और डिजिटल ट्विन सिस्टम जैसी नई तकनीकों से भी परिचित कराया गया। ये तकनीकें न केवल उद्योगों में मशीनरी की निगरानी और रखरखाव के तरीके को बदल रही हैं, बल्कि वे भविष्य के निर्माण उद्योग को एक नई दिशा भी दे रही हैं। इन तकनीकों के माध्यम से, छात्रों को यह अनुभव हुआ कि कैसे इनोवेशन और उन्नति के द्वारा इंडस्ट्री में सुधार किया जा सकता है।
COEP उद्योग से जुड़ी शिक्षा का महत्वपूर्ण कदम
इस बूटकैम्प के आयोजन का मुख्य उद्देश्य था छात्रों को सिर्फ किताबों से बाहर निकलकर वास्तविक जीवन में उपयोग होने वाली तकनीकों के साथ तैयार करना। FSID के प्रोडक्ट एक्सेलेरेशन डायरेक्टर योगेश पांडे ने बताया कि यह बूटकैम्प ‘प्रवृद्धि’ नामक एक राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा था, जो आधुनिक निर्माण प्रणालियों पर आधारित है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य हजारों छात्रों को मेकेनिकल इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट के उच्च-प्रभाव क्षेत्रों में प्रशिक्षित करना है, ताकि वे अपनी जॉब्स में तुरंत योगदान दे सकें।
इस पहल का प्रमुख उद्देश्य भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक कदम और बढ़ाना है, जैसा कि ‘विकसित भारत 2047’ मिशन में उल्लेख किया गया है। इसके तहत, छात्रों को ऐसे औद्योगिक बदलावों से परिचित कराया गया, जो आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएंगे।
COEP प्रोफेसरों का सहयोग और महत्व
COEP के उपकुलपति प्रोफेसर सुनील भिरुड और मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रोफेसर नागेश चौगुले ने इस आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। डॉ. विकास फाले, जो मुंबई के VJTI से जुड़े हुए हैं, ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना सहयोग दिया। इन सभी की मेहनत ने इस बूटकैम्प को न केवल एक तकनीकी पहलू से बल्कि एक प्रेरणादायक अवसर के रूप में स्थापित किया।
FSID और उसकी उद्योग-अकादमिक साझेदारी
FSID, जिसे भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) द्वारा स्थापित किया गया था, विज्ञान को उद्योग-तैयार समाधान में बदलने के प्रयास में निरंतर काम कर रहा है। इसके विभिन्न वर्टिकल्स जैसे CORE Labs, STEM Cell, TIME और SEED, इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हैं। इस बूटकैम्प की सफलता को देखते हुए, FSID का यह प्रयास भारतीय छात्रों को उच्चतम स्तर की तकनीकी शिक्षा देने का है, ताकि वे वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने यह साबित किया कि जब शिक्षा को उद्योग से जोड़ दिया जाता है, तो छात्रों का विकास केवल उनकी अकादमिक जानकारी तक ही सीमित नहीं रहता। उन्हें व्यावहारिक ज्ञान और नए उद्योग मानकों से भी अवगत कराया जाता है, जो उन्हें नौकरी के लिए तैयार कर देता है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से भारत में उभरते हुए इंजीनियरिंग छात्रों को दुनिया की सबसे नई और सबसे प्रभावशाली तकनीकों का अनुभव हो रहा है।
Also more: IBPS PO & SO 2025: फॉर्म में गलती सुधारें – बस दो दिन का समय!
Disclaimer: इस लेख का उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है। सभी विवरण केवल सार्वजनिक स्त्रोतों और रिपोर्टों पर आधारित हैं। लेखक और वेबसाइट कोई भी जिम्मेदारी नहीं स्वीकारते हैं!









