Khanpur Hussainabad Plantation Scam
खानपुर हुसैनाबाद में वृक्षारोपण की सच्चाई: सूखे पौधे, टूटी उम्मीदें और जिम्मेदार कौन?

पर्यावरण बचाने की बातें हम सबको आकर्षित करती हैं। “पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ” जैसे नारे सुनकर लगता है कि भविष्य हरा-भरा और सुरक्षित होगा। लेकिन जब इन नारों की जमीनी हकीकत जानने को मिलती है, तो दिल टूट जाता है। अंबेडकर नगर जिले के खानपुर हुसैनाबाद गांव में हुआ वृक्षारोपण अभियान इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है, जहां पौधों के बजाय सूखी टहनियां ही बची हैं और ग्रामीणों की उम्मीदें राख हो चुकी हैं।
सचिवालय में पड़े सूखे पौधे और ग्रामीणों की मायूसी
गांव के सचिवालय के सभागार में रखे पौधे देखभाल के अभाव में सूखकर बर्बाद हो चुके हैं। ग्रामीण बताते हैं कि जब भी वे पौधे मांगने जाते हैं तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर, जिम्मेदार अधिकारी और प्रधान आपस में आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में उलझे हैं।
Blame Game: प्रधान और अधिकारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप
ग्राम प्रधान मनीराम यादव का कहना है कि उन्हें शुरू से ही सूखे पौधे मिले थे और उन्होंने पूरी कोशिश की कि उन्हें लगाया जाए, मगर हालात ने साथ नहीं दिया। इस दावे को क्षेत्रीय वन अधिकारी स्नेह कुमार ने नकारते हुए कहा कि पौधशालाओं से कभी भी सूखे पौधे नहीं दिए जाते और अब इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
Broken Hopes: ग्रामीणों की बेबसी और टूटता भरोसा
ग्रामीणों की बेबसी इससे साफ झलकती है कि पौधों के नाम पर उन्हें सिर्फ सूखी मिट्टी मिल रही है। एक ग्रामीण ने गुस्से में कहा कि “सरकार पर्यावरण बचाओ का नारा तो देती है, लेकिन असलियत में सचिवालय की टाइल्स पर पड़े सूखे पौधे ही हकीकत बताते हैं।”
Government Scheme Failure: वीडियो से खुली पोल और कार्रवाई के संकेत
इस मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब एपीओ मनरेगा मनोज चतुर्वेदी ने इन सूखे पौधों का वीडियो देखा। उन्होंने इसे ग्राम प्रधान की लापरवाही बताते हुए कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया। वहीं, पंचायत अधिकारी से संपर्क करने की कोशिशें भी नाकाम रहीं क्योंकि उनका फोन लगातार बंद मिला।
Worry For Future: भविष्य की चिंता और ग्रामीणों की उम्मीदें
ग्रामीण अब उच्च अधिकारियों से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि वे हस्तक्षेप कर सच्चाई सामने लाएंगे और जिम्मेदारों को सजा देंगे। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो करोड़ों की सरकारी योजनाएं कागजों में ही दम तोड़ देंगी और आने वाली पीढ़ियां हरियाली से वंचित रह जाएंगी।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध समाचार और जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना है।
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