अंबेडकर नगर: स्वदेशी मेला–2025 MSME ने बढ़ाया आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

Published On: October 10, 2025
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अंबेडकर नगर की हवा इन दिनों उत्साह और उम्मीदों से भरी है। जिले में स्वदेशी मेला–2025 की गूंज हर ओर सुनाई दे रही है। यह मेला न केवल स्थानीय उत्पादों की सुंदर झलक दिखा रहा है, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की उस सोच को भी साकार कर रहा है, जिसमें हर व्यक्ति आत्मनिर्भर बने और गाँव–गाँव की कला को वैश्विक पहचान मिले।

लोकल से ग्लोबल तक – आत्मनिर्भरता की नई उड़ान

9 अक्टूबर 2025 को अंबेडकर नगर के लो‍हिया भवन सभागार में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री राकेश सचान ने फीता काटकर स्वदेशी मेला–2025 का शुभारंभ किया। यह आयोजन यू.पी. इंटरनेशनल ट्रेड शो–2025 के अंतर्गत किया गया है। मेले का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के ग्रामीण उद्यमियों, हस्तशिल्पियों, बुनकरों और युवा उद्यमियों को मंच देना है ताकि वे अपने हुनर और उत्पादों को न केवल राज्य, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिला सकें।

इस अवसर पर कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे — विधायक धर्मराज निषाद, जिला पंचायत अध्यक्ष श्याम सुंदर वर्मा, जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला और भाजपा अध्यक्ष त्र्यंबक तिवारी ने भी मंच साझा किया। पूरा कार्यक्रम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त कदम के रूप में देखा जा रहा है।

मेले में स्वदेशी उत्पादों की झलक और योजनाओं की जानकारी

मेले में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं और स्थानीय उत्पादों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई है। यहां “एक जनपद एक उत्पाद (ODOP)” योजना के अंतर्गत अंबेडकर नगर के पारंपरिक उद्योगों को प्रमुखता दी गई है। मंत्री राकेश सचान ने अधिकारियों से कहा कि सरकार की हर योजना की जानकारी गाँव तक पहुँचे और पात्र लाभार्थियों को उसका लाभ समय पर मिले।

उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रेड शो आयोजित किया था। उस आयोजन में रूस बिज़नेस पार्टनर के रूप में शामिल हुआ था और लगभग ₹11,500 करोड़ का व्यापार संपन्न हुआ था। यह तथ्य अपने आप में प्रदेश की आर्थिक प्रगति की गवाही देता है।

युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम

मेले के दौरान युवाओं और नए उद्यमियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का विशेष उल्लेख किया गया। मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना जैसी योजनाएँ युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं।

अंबेडकर नगर में इन योजनाओं के प्रति लोगों का उत्साह इतना अधिक है कि जहाँ 1,900 आवेदन का लक्ष्य था, वहीं 4,500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 3,800 को स्वीकृति दी गई और 1,326 लाभार्थियों को ऋण वितरण किया गया। मंत्री ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि इन ऋणों का वितरण बिना ब्याज और बिना गारंटी के किया जाए, ताकि कोई भी नव उद्यमी पीछे न रह जाए।

बुनकरों और हस्तशिल्पियों के लिए नई उम्मीदें

अंबेडकर नगर को “बुनकरों का नगर” कहा जाता है। ODOP योजना के तहत यहाँ की बुनकरी को विशेष प्राथमिकता दी गई है। मंत्री राकेश सचान ने इस क्षेत्र की मजबूती के लिए एक और कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) स्वीकृत करने का आश्वासन दिया।

बुनकरों को प्रशिक्षण, टूलकिट, ऋण और विपणन सहायता प्रदान की जा रही है ताकि वे अपने उत्पादों को देश और विदेश में बेच सकें। इस पहल से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि पारंपरिक कला और शिल्प को भी नई पहचान मिलेगी।

लाभार्थियों को मिली सहायता और सम्मान अंबेडकर नगर

मेले के मंच पर पाँच लाभार्थियों को प्रतीकात्मक रूप से डेमो चेक प्रदान किए गए। इनमें श्री निखिल कसौधन – ₹5 लाख (नमकीन उद्योग), श्रीमती कंचन – ₹5 लाख (डेयरी उद्योग), श्रीमती रीता देवी – ₹5 लाख (प्रिंटिंग प्रेस), श्री मुकेश कुमार – ₹1.5 लाख (CSC केंद्र) और श्री आकाश प्रजापति – ₹2.5 लाख (हार्डवेयर व्यवसाय) शामिल रहे।

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इसके अतिरिक्त पाँच लाभार्थियों को विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अंतर्गत सिलाई मशीन और टूलकिट भी वितरित किए गए। यह दृश्य उपस्थित सभी लोगों के लिए प्रेरणादायक था — यह इस बात का प्रतीक था कि सरकार की योजनाएँ अब जमीनी स्तर पर असर दिखा रही हैं।

दस दिनों तक चलेगा यह उत्सव

स्वदेशी मेला–2025, 9 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें उद्योग विभाग, एनआरएलएम, डूडा, पर्यटन, कृषि, मत्स्य, खाद्य ग्रामोद्योग और बैंकिंग विभाग सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। यह मेला पूरी तरह निःशुल्क है और प्रतिदिन जनता के लिए खुला रहेगा।

मंत्री राकेश सचान ने अपने संबोधन में कहा —
हमारा उद्देश्य है कि गाँव के उत्पादकों को बाजार मिले, स्वदेशी को बल मिले और उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर और विकसित बनाया जाए।

स्वदेशी मेला–2025 न केवल एक व्यापारिक आयोजन है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक सशक्त कदम है। इस मेले ने यह साबित कर दिया है कि यदि सरकार, उद्योग और जनता एक साथ चलें, तो गाँवों की रचनात्मक शक्ति पूरे देश की आर्थिक रीढ़ बन सकती है।

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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सरकारी स्रोतों और स्थानीय रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी आधिकारिक नीति या घोषणा में परिवर्तन की स्थिति में जानकारी में संशोधन संभव है। पाठकों से अनुरोध है कि इसे संदर्भित सूचना के रूप में ही देखें।

Suryanshu Srivastava

My name is Suryanshu Srivastava. I am from Ambedkar Nagar, Uttar Pradesh. I am writing articles on News, Education and Technology for almost 2 years. Email : 7theliolala07@gmail.com

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